बुधवार, 27 मार्च 2019


 मानवता और भाईचारे की मिसाल मनजोत सिंह 

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 समरीन की दोनों किडनियां फेल हो चुकी हैं और उनके परिवार ने उन्हें किडनी दान देने का फैसला लिया,लेकिन किसी की किडनी उनसे मैच नहीं हुई. वहीं मनजोत ने अपनी सहेली को अपनी एक किडनी देने का फैसला किया लेकिन मनजीत के इस फैसले के आड़े उसके अपने पिता आगये है. मामला अदालत में पहुंच गया.  मनजोत ने कहा कि वो अपने परिवार की बात समझती हैलेकिन सभी को इन सबसे ऊपर उठना होगा. मैं उन्हें गलत नहीं कह रही. उनके नजरिये से वो सही हैंलेकिन हमें इन भावनाओं से ऊपर उठना चाहिए और वो करना चाहिए जिसके लिए परमात्मा ने हमें इस संसार में भेजा है.

मानवता की मिसाल मनजोत कोहली 
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हाभारत काल में दुर्योधन और करण की मित्रता एक मिसाल थी. दोस्ती के लिए कुछ लोग जाति-धर्म और सरहद को भी लांघ देते हैं. ऐसे लोग मदद करते हुए समय नहीं देखते हैं बस मदद करते हैं. ऐसे लोग समाज के लिए मिसाल बन जाते हैं. उनके किस्से लोगों के बीच सुनाए जाते हैं. उनकी दोस्ती की चर्चा होती है.
जिस कश्मीर में अलगाववादी हिंदू-मुस्लिमों के बीच दरार डालने में लगी हैं. वहींएक हिंदू बेटी मुस्लिम सहेली की जान बचाने के लिए उसे अपनी एक किडनी देगी. जम्मू के ऊधमपुर जिले के सब्जी मंडी इलाके में रहने वाली 23 वर्षीय मनजोत कोहली राजौरी जिले के जवाहर नगर निवासी अपनी मुस्लिम सहेली 22 वर्षीय समरीन अख्तर को किडनी देगी. मनजोत पिछले कई वर्षो से समाज सेविका के तौर पर काम कर रही है. मगर अब वह समाज सेवा के क्षेत्र में उन सभी से आगे निकल गई हैजो अपने स्वार्थ सिद्ध करने के लिए समाज सेवी संगठन बनाते हैं, और सरकार से धन प्राप्त कर अपने सुख साधनों पर खर्च करते है.

जम्मू कश्मीर में एक सिख परिवार की महिला ने अपनी एक किडनी अपनी एक मुस्लिम सहेली को दान देने की इच्छा जताई थी, जिसके बाद उसके विकलांग पिता ने अपनी बेटी से उसकी चिकित्सीय हालत को ध्यान में रखते हुए फैसले पर ‘‘पुनर्विचार’’ करने की अपील की है और इस मामले में राज्यपाल से भी हस्तक्षेप की गुहार लगाई है. सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ता मन्जोत कोहली  ने हाल ही में राजौरी  जिले की अपनी 22 वर्षीय मुस्लिम दोस्त समरीन अख्तर को एक किडनी दान देने का फैसला सार्वजनिक किया था, लेकिन साथ ही कहा कि उसके परिवार को इस पर आपत्ति है और श्रीनगर का एक अस्पताल इस प्रक्रिया में देरी कर रहा है.
मन्जोत के पिता गुरदीप सिंह 75 प्रतिशत तक विकलांग हैं और वह चलने में असमर्थ हैं, उन्होंने उधमपुर स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से कहा, ‘‘मैं हाथ जोड़कर अपनी बेटी से मुझे परेशानी से राहत दिलाने के लिए इस योजना को छोड़ने का अनुरोध करता हूं जैसा कि आपको मेरी चिकित्सीय हाल के बारे में पता है और उसके बाद कोई भी मेरी देखभाल करने वाला नहीं है।’’ उन्होंने सौरा के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसकेआईएमएस) को पहले ही एक नोटिस भेजा है जिसमें अपनी बेटी के फैसले का विरोध करते हुए कहा है.
समरीनाअख्तर 
‘‘इस मामले में परिवार की सहमति नहीं है.’’
 मंजोत ने कहा कि वो अपने परिवार की बात समझती हैलेकिन सभी को इन सबसे ऊपर उठना होगा. मैं उन्हें गलत नहीं कह रही. उनके नजरिये से वो सही हैंलेकिन हमें इन भावनाओं से ऊपर उठना चाहिए और वो करना चाहिए जिसके लिए परमात्मा ने हमें इस संसार में भेजा है.

समरीन की दोनों किडनियां फेल हो चुकी हैं और उनके परिवार ने उन्हें किडनी दान देने का फैसला लियालेकिन किसी की किडनी उनसे मैच नहीं हुई. वहीं उनकी मां की किडनी मैच हुईलेकिन उनकी सेहत को देखते हुए डॉक्टर्स ने उनकी किडनी लेने से इनकार कर दिया. समरीन का परिवार जब सारी उम्मीदें हार गयातब मंजोत किसी फरिश्ते की तरह उनकी जिंदगी में आईं. मनजोत ने समरीन को अपनी किडनी देने का फैसला लिया है और उनकी किडनी भी समरीन से मैच कर गई है,
मनजीत के परिवार की विवशता 
मनजोत सिंह के माता-पिता के साथ 2014 में एक दुर्घटना हुई थी जिसमें उसकी मां की मौत हो गई जबकि पिता को गंभीर चोटें आई और उनका एक मेजर  ऑपरेशन हुआ. गुरदीप सिंह ने कहा, ‘‘मुझ पर रहम करो और वापस लौट आओ. तुम कुछ अच्छा नहीं कर रही हो क्योंकि तुम्हारे पापा को तुम्हारी जरुरत हैमेरी देखभाल करने के लिए और कौन है यहां. मैं इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर सकता.’’ उन्होंने अपनी बेटी की जान बचाने के लिए इस मामले में राज्यपाल सत्यपाल मलिक से भी हस्तक्षेप करने की अपील की है.
उन्होंने रोते हुए कहा कि उनका इकलौता बेटा दिल्ली में काम कर रहा है और उन्होंने अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए हरसंभव कोशिश की. उन्होंने कहा, ‘‘मैंने उसे अच्छी शिक्षा दी और उसे हिमाचल प्रदेश के उस स्कूल में पढ़ाया जहां बॉलीवुड की कई अभिनेत्रियों ने पढ़ाई की है. जब अख्तर की मां किडनी देने के लिए चिकित्सीय रूप से फिट है तो वे मेरी बेटी को मजबूर क्यों कर रहे हैं.’’
गुरदीप सिंह ने बताया कि उनकी बेटी करीब नौ महीने पहले घर से चली गई थी और उसने एक इंस्टीट्यूट खोल लिया. बेटी ने उनसे कहा कि वह श्रीनगर में तीन महीने के कोर्स के लिए जा रही है. उन्होंने कहा, ‘‘दस नवंबर को वह अपनी दोस्त के साथ आई और मुझे बताया कि वह अपनी किडनी उसे दान देना चाहती है. जब उसकी दोस्त चली गई तो मैंने इसका विरोध किया. वह जो कर रही है वह गैरकानूनी है क्योंकि वह खून के रिश्ते के अलावा किसी और को किडनी दान नहीं दे सकती.’’ उन्होंने इसे बेवजह महान बनने और लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने वाला कदम बताया.
उन्होंने कहा कि लोग उनकी बेटी के फैसले का स्वागत कर रहे हैं जबकि ‘‘मैं जानता हूं कि यह कुछ समय के लिए है और किडनी दान देने के बाद कोई उसे पूछेगा तक नहीं. वे कुछ समय तक उसकी देखभाल करेंगे और फिर....। वह युवा है और मेरी इच्छा उसकी शादी करने की है. किडनी दान देने के बाद कोई उससे शादी नहीं करेगा.’’ दूसरी ओरमनजोत ने कहा था, ‘‘हम पिछले चार साल से दोस्त हैं और मैं भावनात्मक रूप से उससे जुड़ी हूं, साथ ही मेरा इंसानियत में भी पूरा भरोसा है जो मुझे मेरी किडनी दान करने के लिए प्रेरित कर रहा हैं’’
उसने कहा कि अख्तर पिछले कई वर्षों से जम्मू में उसके साथ कई सामाजिक कार्यों में शामिल रही है. उसने कहा, ‘‘लेकिन अख्तर ने कभी मुझे अपनी बीमारी के बारे में नहीं बताया और मुझे एक दोस्त के जरिए यह बात पता चली थी. वह मेरी दोस्त रही है और मुश्किल वक्त में मेरे साथ रही है, मैंने उसे जरुरत पड़ने पर अपनी एक किडनी दान देने का फैसला किया है.’’ मंजीत कोहली अपने घर वालो के खिलाफ कोर्ट पहुँच गयीहै. उसने कोर्ट के समक्ष कहा कि वह अपनी सहेली समरीन अख्तर की जान बचाना चाहती है और इसके लिए वह अपनी एक किडनी उसे दान देना चाहती है. अभी मामला कोर्ट में है लेकिन मंजीत कोहली को उम्मीद है कि कोर्ट उसे इस नेक काम से कभी नहीं रोकेगा, बल्कि उसकी भावनाओं को समझते हुए उसका सहयोग करेगा.